Namaz Padhne Ka Tarika | Namaz Ka Tarika

 Namaz Padhne Ka Tarika:- दुनिया में हर मुसलमान मर्द औरत पर नमाज़ फ़र्ज़ की गयी है। इसलिए सभी को 5 वक़्त की नमाज़ अदा करनी चाहिए। लेकिन बहुत से लोगों को नमाज़ पढ़ने का तरीका नहीं पता है।

नमाज़ का तरीका (Namaz Ka Tarika) हर मोमिन मर्द, औरत पर सीखना फ़र्ज़ है।जैसा की हम जानते है इस्लाम में पांच स्तंभ में से एक स्तंभ नमाज़ है। इस लिए नमाज़ का तरीका (Namaz Ka Tarika) सीखना जरुरी हैं।

Namaz Padhne Ka Tarika | Namaz Ka Tarika

नमाज़ हर वो आदमी जिसने कलमा पढ़ा है और उसकी उम्र 7 साल से जयादा है पर फ़र्ज़ है। अगर कोई भी मुसलमान नमाज़ को दुनिया के कामों के लिए छोड़ता है तो वो अल्लाह की नजर में गुनेहगार है।जैसा की आज कल हो रहा है, लोगो के पास दुनिया के काम करने के लिये वक़्त ही वक़्त है, पर नमाज़ के लिए काम का बहाना कर देते है। उन्हे नही पता वो अल्लाह की नज़र मे गुनाहगार बन रहे हैं।


Namaz Padhne Ka Tarika

Namaz Padhne Ka Tarika:- एक भी नमाज़ जान बूझकर वक़्त गुजार कर पढ़ना यानी क़ज़ा करना कबीरा गुनाह है बद किस्मती से आज मुसलमानो को नमाज़ का बिल्कुल भी परवाह नहीं रही हमारी मस्जिदे वीरान रहती है।

अल्लाह इरशाद फरमाता है "अगर बंदा वक़्त पर नमाज़ कायम रखें तो मेरे बन्दे का जिम्मेए करम अहद है की उस शख्स को अजाब न दूंगा और जन्नत में दाखिल कर दूंगा "|

पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: जब बन्दा अव्वल वक़्त में नमाज़ पढ़ता है तो उसकी नमाज़ आसमानों की तरफ जाती है और वो नूरानी शक्ल में होती है यहाँ तक कि अर्शे इलाही तक जा पहुंचती है और नमाज़ी के लिये क़यामत तक दुआ करती रहती है कि अल्लाह तेरी हिफाज़त फरमाए जैसे तूने मेरी हिफाज़त की है और जब आदमी बे वक़्त नमाज़ पढ़ता है तो उसकी नमाज़ काली शक्ल में आसमानों की तरफ चढ़ती है जब वो आसमान तक पहुँचती है तो उसे पुराने कपड़े की तरह लपेटकर पढ़ने वाले के मुह पर मार दिया जाता है।

“बेशक नमाज़ बेहयाई और बुरे कामो से रोकती है”

इरशाद ए नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम :

“अगर किसी शक्स के दरवाजे पर एक नहर जारी हो और वो रोज़ उसमे पांच बार नहाए तो क्या उसके बदन पर कोई मैल बाकी रहेगा तो सहाबा ने कहा नहीं कोई मैल बाकी नही होगा।

पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया यही

मिसाल पांचो वक़्त की नमाजो की है अल्लाह उनके जरिये से

गुनाहो को मिटा देता है।“

“बच्चा जब 7 साल का हो जाए तो नमाज का हुक्म दो और जब 10 साल का हो जाए तो मारकर पढ़ाओ"

हर मोमिन मुसलमान मर्द और औरत पर हर दिन 5 वक़्त की नमाज़ फर्ज़ है।

  1. फ़ज़्र
  2. ज़ोहर
  3. अस्र 
  4. मग़रिब
  5. ईशा

Namaz Padhne Ke फायदे-

  • नमाज़ पढ़ने से रोजी में बरकत होती है 
  • अज़ाबे क़ब्र से महफूज़ रहेगा।
  • अमाल नामय दाहिने हाथ में मिलेगा !
  • पुल सिरत से बिजली की तरह गुजर जाएगा !
  • जन्नत में दाखिल होगा।
  • नमाज़ कब्र की अजब से हमारी हिफाज़त करती है ।
  • नमाज़ पढ़ने से चेहरे पर नूर आता है 

Namaz Ki शर्तें -

Namaz Padhne Ka Tarika से पहले नमाज़ के लिये कुछ शर्तें हैं अगर इनमें से एक भी शर्त पूरी न हो तो नमाज़ पढ़ ही नहीं सकते। लिहाज़ा हमारे लिये यह ज़रूरी है कि इनके बारे में पूरी जानकारी हासिल करके नमाज़ शुरू करने से पहले इनको पूरा करें।


  • नमाज़ की पहली शर्त तहारत (पाकी):-

इसका ये मतलब है की हमारा जिस्म, कपड़े और नमाज़ पढ़ने की जगह पाक हो।

  • जिस्म का ढका होना:

नमाज की शर्तो मे बेहद जरूरी दूसरी शर्त है कि आपका जिस्म के कुछ बताये गये हिस्से ढ़के रहने चाहिए । जिसे सतर कहते है ।

यह मर्दो और औरतों के लिए अलग-अलग है।

*औरत को नमाज पढ़ते वक़्त अपने चेहरे , दोनो हथेलीयो और दोनो पैर के सिवा पूरा बदन ढका रखना चाहिए।*

*मर्दो को नाफ से लेकर घुटनो तक का पूरा बदन ढका रखना चाहिए।*

  • नियत करना:

नमाज के लिए नियत करना जरूरी होता है, चाहे आप ज़ुबान से नियत करें या दिल ही दिल में।

  • नमाज़ का वक्त होना

किसी भी नमाज़ पढ़ने के लिए नमाज़ का वक़्त होना हाज़मी है। जब तक की अज़ान नही हो जाती  तब तक नमाज़ का सही वक़्त नही होता है। वक्त से पहले कोई भी नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती और वक़्त के बाद पढ़ी जाने वाली नमाज़ कज़ा मानी जाएगी।

  • किबले की तरफ मुह होना

नमाज़ क़िबला रुख होकर पढ़नी चाहिए। किबला रुख यानी पश्चिम की तरफ खड़े होकर पढ़े।

नमाज़ पढ़ने से पहले वज़ू का करना बहुत ही जरूरी होता है। तो आइए पहले हम वज़ू करने का तरीका जान लेते हैं: -


ये भी पढ़ें -    रोज़े रखने की दुआ हिन्दी में पढ़ें 


Wuzu Ka Tarika / वुज़ू का तरीका

Namaz Padhne Ka Tarika जानने से पहले नमाज़ के लिए वजू करने का तरीका ज़रूरी है। वजू किये बिना आप नमाज़ नहीं पढ़ सकते। अगर पढेंगे तो वो सही नहीं मानी जाएगी। वजू का तरीका यह है की आप नमाज़ की लिए वजू का इरादा करे। और वजू शुरू करने से पहले बिस्मिल्लाह कहें. और इस तरह से वजू करे:

  • कलाहियों तक हाथ धोंये
  • कुल्ली करे
  • नाक में पानी चढ़ाये
  • चेहरा धोंये
  • दाढ़ी में खिलाल करें(सिर्फ मर्दो के लिए)
  • दोनों हाथ कुहनियों तक धोंये
  • एक बार सर का और कानों का मसाह करें
  • (मसह का तरीका यह है की आप अपने हाथों को गिला कर के एक बार सर और दोनों कानों पर फेर लें। कानों को अंदर बाहर से अच्छी तरह साफ़ करे। )
  • दोनों पांव टखनों तक धोंये।

अब हमे Namaz Padhne Ka Tarika के लिए जिन बातों का पता होना जरूरी था वो हमलोग ऊपर जान चुके हैं, आइए अब हम 5 वक़्त की नमाजों मे कितनी रकात होती है और इन नमाजों को कैसे पढ़ते हैं वो जानते हैं: -

FAJAR    Sunnat - 2        Farz - 2       Total Rakaat - 4 (alert-success)

ZOHAR    Sunnat - 4*    Farz - 4    Sunnat - 2*    Nafil - 2    Total Rakaat - 12 (alert-success)

ASAR    Sunnat - 4    Farz - 4    Total Rakaat - 8 (alert-success)
MAGRIB    Farz - 3    Sunnat - 2*    Nafil - 2    Total Rakaat - 7 (alert-success)
ISHAA    Sunnat - 4    Farz - 4    Sunnat - 2*    Nafil - 2    Witr - 3    Nafil - 2    Total Rakaat - 17 (alert-success)
JUMMA    Sunnat - 4*    Farz - 2    Sunnat - 4*    Sunnat - 2*    Nafil - 2    Total Rakaat - 14 (alert-success)

Note: - सुन्नत की नमाजें 2 तरह की होती हैं: सुन्नत-ए-मोएक़द्दा, सुन्नत-ए-गैर मोएक़द्दा

सुन्नत-ए-मोएक़द्दा पढ़ना वाजिब है इसे छोड़ नही सकते छोड़ेगे तो गुनाह होगा

सुन्नत-ए-गैर मोएक़द्दा पढ़ना ज़रूरी नही है अगर नहीं भी पढ़ेगे तो गुनाह नही होगा, और पढ़ लेंगे तो सवाब ही होगा

ऊपर बने बॉक्स मे * का निशान सुन्नत-ए-मोएक़द्दा को दर्शाता है। जिसका पढ़ना वाजिब है।

Namaz Ka Tarika - Step by Step

अब ऊपर समझाए गए तरीके के बाद अब Namaz Ka Tarika या Namaz Padhne Ka Tarika को स्टेप में समझ लेते हैं। मर्द और औरत के नमाज़ पढ़ने का तरीका थोड़ा सा अलग है। आईए उसके बारे मे तफसील से जानते है।


Mard Ke Namaz Padhne Ka Tarika:-

Note:- फ़र्ज़ की नमाज़ शुरू करने से पहले तकबीर पढ़ी जाती है

नमाज़ या तो 2 रक’आत की  या 3, या 4 रक’आत की होती है। एक रक’आत में एक क़याम, एक रुकू और दो सजदे होते है।

नमाज़ अदा करने के लिए हमे नमाज़ मे पढ़ी जाने वाली सूरह और दूसरी जरूरी कलमात का याद होना जरूरी है, जिससे हमे पाँच वक़्त की नमाज़ को अदा करने मे कोई परेशानी न हो।


अज़कार-ए-नमाज़: -

  • नियत:- नियत करता/करती हूं मैं 4 रकात फर्ज़ नमाज़ ज़ुहर की अल्लाह तआला के वास्ते …रुख मेरा काबा शरीफ के तरफ….अल्लाहु अकबर ! (आप वक्त और नमाज़ के हिसाब से इसे बदल भी सकते हैं)
  • तकबीर: - अल्लाहु अकबर।
  • सना: - सना सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दीका व तबारका इस्मुका व त’आला जद्दुका वाला इलाहा गैरुका
  • त’अव्वुज; - “आउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम”
  • तसमियाह: - “बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम” 
  • रुकु की तसबीह: - *सुबहान रब्बी अल अज़ीम*
  • सजदे की तसबीह: - *सुबहान रब्बी अल आला*
  • तसमीह: - ‘समीअल्लाहु लिमन हमीदा’
  • तहमीद: - रब्बना व लकल हम्द
  • तशहुद: - अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलावातु, वत्त्तय्यिबातु, अस्सलामु 'अलैका' अय्युहं-नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू, अस्सलामु 'अलेना व 'अला 'इबदिल्लाहिस-सालिहीन। 'अश-हदू 'अं-ला 'इलाहा 'इल्लल्लाहू व 'अश-हदू 'अन्ना मुहम्मदन 'अब्दुहु व रसूलुहु।
  • दुरूद-ए-इब्राहीम: - अल्लाहुम्मा सल्लि 'अला मुहम्मदीन व' अला' आलि मुहम्मदीन, कमा सल्लयता 'अला' इब्राहीमा व 'अला' आली 'इब्राहीमा,' इन्नका हमीदुन मजीद।  अल्लाहुम्मा बारिक 'अला मुहम्मदीन व' अला 'आली मुहम्मदीन, कमा बारकता' अला 'इब्राहीमा व' अला' आली 'इब्राहीमा,' इन्नाका हमीदुन मजीद।
  • दुआ-ए-मसुरा: - अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा, वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता, फग़फिरली मग़ फि-र-तम्मिन ‘इनदिका, वर ‘हमनी इन्नका अनतल ग़फ़ूरूर्र रहीम
  • सलाम: - अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह
  • दुआ-ए-क़ुनूत: - इसको देखने या पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

फ़र्ज़ नमाजें और पढ़ने का तरीका:-

सबसे पहले आपको फर्ज़ Namaz Padhne Ka Tarika को बताएंगे उसके बाद आपको सुन्नत और वित्र आदि Namaz Padhne Ka Tarika को समझेंगे।


फर्ज़ नमाज़ 2 रक’आत (FAJR)-

पहली रक’आत:-

पहले नियत करें: नियत की मैंने 2 रक’आत फ़र्ज़ नमाज़ वक़्त fajr की वास्ते अल्लाह तआला के रुख मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाहु अकबर।

फिर तकबीर कहें: अल्लाहु अकबर (तकबीर कहते हुए हाथ बांध लें)

हाथ बाँधने के बाद सना पढ़िए।

इसके बाद त’अव्वुज पढ़े। त’अव्वुज के अल्फाज़ यह है “आउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम” और तसमियाह “(बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम)” पढ़ें।

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

इसके बाद अल्लाहु अकबर (तकबीर) कह कर रुकू में जायें। रुकू में ही अल्लाह की ये तस्बीह 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े – *सुबहान रब्बी अल अज़ीम*। रुकू में निगाह पैरो के अंगूंठो पर रखे।

इसके बाद तसमी (‘समीअल्लाहु लिमन हमीदा’) कहते हुवे रुकू से खड़े हो जाये।

इसके बाद ‘रब्बना व लकल हम्द कहे फिर अल्लाहु-अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सजदे में जाते वक़्त सबसे पहले हाथ घुटनो पर रखे फिर घुटने जमीन पर टिकाये फिर हाथ जमींन पर रखे!

उसके बाद नाक जमीन पर टेके फिर पेशानी जमीन पर जमाये ! और चेहरा दोनों हाथो के दरमियान रखे।  मर्द अपने हाथो की हथेलियाँ ही जमाये और कोहनी वगैरह ऊँची उठी हुई होना चाहिए। पेट को अपनी रानो से दूर रखे यानी जांघ से पेट ना छुए।

सज्दे में फिर *सुबहान रब्बी अल आला* 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े।

इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे से उठकर बैठे।

फिर दोबारा अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सज्दे में फिर से 3 या 5 या 7 बार *सुबहान रब्बी अल आला* पढ़े।

इस तरह आपकी एक रिकायत पूरी हो गयी।


दूसरी रक’आत-

पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

फिर रुकु करें और पहली रक’आत की तरह 2 सजदे करें ओर बैठ जाएं।

उसके बाद तशहुद पढ़ें

तशहुद पढ़ने के बाद अपने दाहिने हाथ की शहादत की ऊँगली उठा के *अशहदु अल्ला इलाहा इल्ललाहू व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसुलहू* पढ़ते हुए ऊँगली गिरा लेना है।

इसके बाद दुरूद-ए-इब्राहीम पढ़ना है।

और आखिर में दुआ-ए-मसुरा पढ़ना है।

फिर आप सलाम यानी के (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) कहते हुवे अपनी दाहिने तरफ अपने सर को मोड़िये फिर दुबारा उसी तरह (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) बोलते हुवे अपनी सर को बाए तरफ मोड़ें।


फर्ज़ नमाज़ 4 रक’आत (ZOHAR / ASAR / ISHAA)-

पहली रक’आत:-

पहले नियत करें।  

फिर तकबीर कहें: अल्लाहु अकबर (तकबीर कहते हुए हाथ बांध लें)

हाथ बाँधने के बाद सना पढ़िए।

इसके बाद त’अव्वुज पढ़े। त’अव्वुज के अल्फाज़ यह है “आउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम” और तसमियाह “(बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम)” पढ़ें।

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

इसके बाद अल्लाहु अकबर (तकबीर) कह कर रुकू में जायें। रुकू में ही अल्लाह की ये तस्बीह 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े – *सुबहान रब्बी अल अज़ीम*। रुकू में निगाह पैरो के अंगूंठो पर रखे।

इसके बाद तसमी (‘समीअल्लाहु लिमन हमीदा’) कहते हुवे रुकू से खड़े हो जाये।

इसके बाद ‘रब्बना व लकल हम्द कहे फिर अल्लाहु-अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सजदे में जाते वक़्त सबसे पहले हाथ घुटनो पर रखे फिर घुटने जमीन पर टिकाये फिर हाथ जमींन पर रखे!

उसके बाद नाक जमीन पर टेके फिर पेशानी जमीन पर जमाये ! और चेहरा दोनों हाथो के दरमियान रखे।  मर्द अपने हाथो की हथेलियाँ ही जमाये और कोहनी वगैरह ऊँची उठी हुई होना चाहिए। पेट को अपनी रानो से दूर रखे यानी जांघ से पेट ना छुए।

सज्दे में फिर *सुबहान रब्बी अल आला* 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े।

इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे से उठकर बैठे।

फिर दोबारा अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सज्दे में फिर से 3 या 5 या 7 बार *सुबहान रब्बी अल आला* पढ़े।

फिर दूसरी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं।


दूसरी रक’आत-

पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें और बैठ जाएं।

उसके बाद तशहुद पढ़ें और (फिर तीसरी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं)


तीसरी रक’आत

तीसरी रक’आत के लिए खड़े होते ही पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े।

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें (फिर चौथी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं)


चौथी रक’आत

पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े।

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें ओर बैठ जाएं।

उसके बाद तशहुद पढ़ें

तशहुद पढ़ने के बाद अपने दाहिने हाथ की शहादत की ऊँगली उठा के *अशहदु अल्ला इलाहा इल्ललाहू व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसुलहू* पढ़ते हुए ऊँगली गिरा लेना है।

इसके बाद दुरूद-ए-इब्राहीम पढ़ना है।

और आखिर में दुआ-ए-मसुरा पढ़ना है।

फिर आप सलाम यानी के (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) कहते हुवे अपनी दाहिने तरफ अपने सर को मोड़िये फिर दुबारा उसी तरह (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) बोलते हुवे अपनी सर को बाए तरफ मोड़ें।

Note:-  किसी भी फ़र्ज़ नमाज़ के तीसरी और चौथी रिकायात् मे सिर्फ और सिर्फ सूरह फातिहा पढ़ी जाती है उसके बाद कोई सूरह नही पढ़ी जाती है। (alert-warning)


फर्ज़ नमाज़ 3 रक’आत (MAGRIB)-

पहली रक’आत:-

पहले नियत करें।  

फिर तकबीर कहें: अल्लाहु अकबर (तकबीर कहते हुए हाथ बांध लें)

हाथ बाँधने के बाद सना पढ़िए।

इसके बाद त’अव्वुज पढ़े। त’अव्वुज के अल्फाज़ यह है “आउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम” और तसमियाह “(बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम)” पढ़ें।

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

इसके बाद अल्लाहु अकबर (तकबीर) कह कर रुकू में जायें। रुकू में ही अल्लाह की ये तस्बीह 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े – *सुबहान रब्बी अल अज़ीम*। रुकू में निगाह पैरो के अंगूंठो पर रखे।

इसके बाद तसमी (‘समीअल्लाहु लिमन हमीदा’) कहते हुवे रुकू से खड़े हो जाये।

इसके बाद ‘रब्बना व लकल हम्द कहे फिर अल्लाहु-अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सजदे में जाते वक़्त सबसे पहले हाथ घुटनो पर रखे फिर घुटने जमीन पर टिकाये फिर हाथ जमींन पर रखे!

उसके बाद नाक जमीन पर टेके फिर पेशानी जमीन पर जमाये ! और चेहरा दोनों हाथो के दरमियान रखे।  मर्द अपने हाथो की हथेलियाँ ही जमाये और कोहनी वगैरह ऊँची उठी हुई होना चाहिए। पेट को अपनी रानो से दूर रखे यानी जांघ से पेट ना छुए।

सज्दे में फिर *सुबहान रब्बी अल आला* 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े।

इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे से उठकर बैठे।

फिर दोबारा अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सज्दे में फिर से 3 या 5 या 7 बार *सुबहान रब्बी अल आला* पढ़े।

फिर दूसरी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं।


दूसरी रक’आत

पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें और बैठ जाएं।

उसके बाद तशहुद पढ़ें और (फिर तीसरी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं)


तीसरी रक’आत

तीसरी रक’आत के लिए खड़े होते ही पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े।

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें ओर बैठ जाएं।

उसके बाद तशहुद पढ़ें

तशहुद पढ़ने के बाद अपने दाहिने हाथ की शहादत की ऊँगली उठा के *अशहदु अल्ला इलाहा इल्ललाहू व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसुलहू* पढ़ते हुए ऊँगली गिरा लेना है।

इसके बाद दुरूद-ए-इब्राहीम पढ़ना है।

और आखिर में दुआ-ए-मसुरा पढ़ना है।

फिर आप सलाम यानी के (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) कहते हुवे अपनी दाहिने तरफ अपने सर को मोड़िये फिर दुबारा उसी तरह (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) बोलते हुवे अपनी सर को बाए तरफ मोड़ें।


सुन्नत नमाज़ और पढ़ने का तरीका: -

अब आपको फर्ज नमाज़ के बाद सुन्नत की Namaz Ka Tarika या Namaz Padhne Ka Tarika जान लेते हैं।

4 रक’आत सुन्नत नमाज़ (ZOHAR / ASAR / ISHAA से पहले की)-

पहली रक’आत:-

पहले नियत करें।  

फिर तकबीर कहें: अल्लाहु अकबर (तकबीर कहते हुए हाथ बांध लें)

हाथ बाँधने के बाद सना पढ़िए।

इसके बाद त’अव्वुज पढ़े। त’अव्वुज के अल्फाज़ यह है “आउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम” और तसमियाह “(बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम)” पढ़ें।

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

इसके बाद अल्लाहु अकबर (तकबीर) कह कर रुकू में जायें। रुकू में ही अल्लाह की ये तस्बीह 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े – *सुबहान रब्बी अल अज़ीम*। रुकू में निगाह पैरो के अंगूंठो पर रखे।

इसके बाद तसमी (‘समीअल्लाहु लिमन हमीदा’) कहते हुवे रुकू से खड़े हो जाये।

इसके बाद ‘रब्बना व लकल हम्द कहे फिर अल्लाहु-अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सजदे में जाते वक़्त सबसे पहले हाथ घुटनो पर रखे फिर घुटने जमीन पर टिकाये फिर हाथ जमींन पर रखे!

उसके बाद नाक जमीन पर टेके फिर पेशानी जमीन पर जमाये ! और चेहरा दोनों हाथो के दरमियान रखे।  मर्द अपने हाथो की हथेलियाँ ही जमाये और कोहनी वगैरह ऊँची उठी हुई होना चाहिए। पेट को अपनी रानो से दूर रखे यानी जांघ से पेट ना छुए।

सज्दे में फिर *सुबहान रब्बी अल आला* 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े।

इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे से उठकर बैठे।

फिर दोबारा अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सज्दे में फिर से 3 या 5 या 7 बार *सुबहान रब्बी अल आला* पढ़े।

फिर दूसरी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं।


दूसरी रक’आत-

पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें और बैठ जाएं।

उसके बाद तशहुद पढ़ें और (फिर तीसरी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं)


तीसरी रक’आत -

तीसरी रक’आत के लिए खड़े होते ही पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें (फिर चौथी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं)


चौथी रक’आत-

पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें ओर बैठ जाएं।

उसके बाद तशहुद पढ़ें

तशहुद पढ़ने के बाद अपने दाहिने हाथ की शहादत की ऊँगली उठा के *अशहदु अल्ला इलाहा इल्ललाहू व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसुलहू* पढ़ते हुए ऊँगली गिरा लेना है।

इसके बाद दुरूद-ए-इब्राहीम पढ़ना है।

और आखिर में दुआ-ए-मसुरा पढ़ना है।

फिर आप सलाम यानी के (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) कहते हुवे अपनी दाहिने तरफ अपने सर को मोड़िये फिर दुबारा उसी तरह (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) बोलते हुवे अपनी सर को बाए तरफ मोड़ें।

Note:- 2 रक’आत सुन्नत और नफील की नमाज़ (Fajr की फ़र्ज़ नमाज़ से पहले / Zohar, Maghrib और ईशा की फ़र्ज़ नमाज़ के बाद) की नमाज़ का तरीक़ा Fajr की फ़र्ज़ नमाज़ की ही तरह है सिर्फ नियत में सुन्नत या नफील का कहना चाहिए, और उसी तरह NAMAAZ E TAHAJJUD , ISHRAAQ , TARAWEEH का भी यही तरीका है सिर्फ नियत बदलेगी। (alert-warning)

वित्र की नमाज़ का तरीका: -

3 रक’आत वित्र की नमाज़ (ISHAA के फ़र्ज़ और सुन्नत नमाज़ के बाद)

पहली रक’आत:-

पहले नियत करें।  

फिर तकबीर कहें: अल्लाहु अकबर (तकबीर कहते हुए हाथ बांध लें)

हाथ बाँधने के बाद सना पढ़िए।

इसके बाद त’अव्वुज पढ़े। त’अव्वुज के अल्फाज़ यह है “आउजू बिल्लाहि मिनश शैतान निर्रजिम” और तसमियाह “(बिस्मिल्लाही र्रहमानिर रहीम)” पढ़ें।

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

इसके बाद अल्लाहु अकबर (तकबीर) कह कर रुकू में जायें। रुकू में ही अल्लाह की ये तस्बीह 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े – *सुबहान रब्बी अल अज़ीम*। रुकू में निगाह पैरो के अंगूंठो पर रखे।

इसके बाद तसमी (‘समीअल्लाहु लिमन हमीदा’) कहते हुवे रुकू से खड़े हो जाये।

इसके बाद ‘रब्बना व लकल हम्द कहे फिर अल्लाहु-अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सजदे में जाते वक़्त सबसे पहले हाथ घुटनो पर रखे फिर घुटने जमीन पर टिकाये फिर हाथ जमींन पर रखे!

उसके बाद नाक जमीन पर टेके फिर पेशानी जमीन पर जमाये ! और चेहरा दोनों हाथो के दरमियान रखे।  मर्द अपने हाथो की हथेलियाँ ही जमाये और कोहनी वगैरह ऊँची उठी हुई होना चाहिए। पेट को अपनी रानो से दूर रखे यानी जांघ से पेट ना छुए।

सज्दे में फिर *सुबहान रब्बी अल आला* 3 या 5 या 7 बार इत्मीनान के साथ पढ़े।

इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे से उठकर बैठे।

फिर दोबारा अल्लाहु अकबर कहते हुवे सज्दे में जायें। सज्दे में फिर से 3 या 5 या 7 बार *सुबहान रब्बी अल आला* पढ़े।

फिर दूसरी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं।


दूसरी रक’आत-

पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें और बैठ जाएं।

उसके बाद तशहुद पढ़ें और (फिर तीसरी रक’आत के लिए खड़े हो जाएं)


तीसरी रक’आत-

तीसरी रक’आत के लिए खड़े होते ही पहले तसमियाह पढ़ें

इसके बाद सुरे फातिहा पढ़े। सुरह फातिहा के बाद कोई भी क़ुरान शरीफ की सूरह जो आपको याद हो वो पढ़े। 

सूरह पढ़ने के बाद यहाँ रुकू में नही जाना है बल्कि अल्लाहु अकबर कहते हुवे अपने दोनों हांथों को कानो के लॉ तक ले जाना है और फिर अपने नाफ के निचे बाँध लेना है।

हाँथ बाँधने के बाद एक मर्तबा आप दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ें |

फिर रुकु करें और 2 सजदे करें ओर बैठ जाएं।

उसके बाद तशहुद पढ़ें

तशहुद पढ़ने के बाद अपने दाहिने हाथ की शहादत की ऊँगली उठा के *अशहदु अल्ला इलाहा इल्ललाहू व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसुलहू* पढ़ते हुए ऊँगली गिरा लेना है।

इसके बाद दुरूद-ए-इब्राहीम पढ़ना है।

और आखिर में दुआ-ए-मसुरा पढ़ना है।

फिर आप सलाम यानी के (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) कहते हुवे अपनी दाहिने तरफ अपने सर को मोड़िये फिर दुबारा उसी तरह (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह) बोलते हुवे अपनी सर को बाए तरफ मोड़ें।


Aurto Ke Namaz Padhne Ka Tarika

मर्द और औरत की Namaz Padhne Ka Tarika मे ज्यादा कोई फर्क नही है लेकिन कुछ फर्क है जिसे जान लेना बहुत जरूरी है तो आईए जानते है औरतो की नमाज़ कैसे पढ़ी जाती है:-

Namaz Padhne Ka Tarika | Namaz Ka Tarika

नमाज़ की निय्यत कर के अल्लाहु अकबर कहे और अल्लाहु अकबर कहते वक़्त अपने दोनों हाथ कंधे तक उठाए लेकिन हाथों को दुपट्टा से बाहर न निकाले फिर सीने पर हाथ बाँध ले और दाहने हाथ की हथेली को बाएं हाथ की हथेली की पुश्त यानि कलाई पर रखे और सना पढ़े...

फिर बिस्मिल्लाह पढ़ कर सूरह फातिहा पढ़े उसके बाद कोई भी सूरह पढ़े जो आपको याद हो।

*उसके बाद आप अल्लाहु अकबर कहते हुवे रुकू में जाएँ।

रुकू में दोनों हाथ की उंगलियाँ मिला कर घुटनों पर रख दे और दोनों पैर के टखने बिल्कुल मिला दे यानि दोनों पैर बिल्कुल सटा दे।

फिर समी अल्लाह हुलेमन हमीदा कहते हुवे खड़े हो जाएँ जब आप खड़े हो जाएँ तो एक मर्तबा रब्बना लकल हम्द भी कहें।

 फिर अल्लाहु अकबर कहती हुई सजदे में जाए

( सजदे मे बैठने का तरीका मर्द से अलग है जो इस तरह है:)

ज़मीन पर पहले घुटने रखे- फिर कानों के बराबर ज़मीन पर हाथ रखे और उंगलियाँ आपस में खूब मिलाए फिर दोनों हाथ के बीच में माथा रखे और सजदे के वक़्त माथा और नाक दोनों ज़मीन पर रखदे और हाथ और पाओं की उंगलियाँ किब्ला यानि पच्छिम की तरफ रखे मगर पाओं खड़े न करे मर्द की तरह, बल्कि दोनों पैर दाहनी तरफ को निकाल दे और खूब सिमट कर और दब कर सजदा करे पेट दोनों रानों से और बाहें दोनों पहलू से मिला ले और दोनों बांहे ज़मीन पर रख दे।

दोनो सजदे करने के बाद  फिर अल्लाहु अकबर कहती हुई खड़ी हो जाए।

इस तरह एक रिकायात पूरी हो गयी।

दूसरी रिकायात मे सूरह फातिहा पढ़े उसके बाद कोई भी सूरह पढ़े जो आपको याद हो।

*उसके बाद आप अल्लाहु अकबर कहते हुवे रुकू में जाएँ।

*फिर समी अल्लाह हुलेमन हमीदा कहते हुवे खड़े हो जाएँ जब आप खड़ी हो जाएँ तो एक मर्तबा रब्बना लकल हम्द भी कहें।

*फिर आप अल्लाहु अकबर कहते हुवे दोनो सजदे के लिए जाएँ।

दोनो सजदा करने के बाद  अत्तहिय्यात पढ़ने के लिए बाएं कमर पर बैठे और अपने दोनों पाओं दाहनी तरफ निकाल दे और दोनों हाथ अपनी रानों पर रखले और उंगलियाँ खूब मिला कर यानि खूब सटा कर रखे- फिर  अत्तहिय्यात पढ़े ....

फिर कलमा शहादत पढ़े और जब अश्हदु अल्ला इला ह पर पहुँचे तो बीच की ऊँगली और अंगूठे से गोल कर के शहादत की उँगली को उठाए और इल्लल्लाह कहते वक़्त झुका दे।

उसके बाद एक मर्तबा दरूद शरीफ पढ़ें |

उसके बाद एक मर्तबा दुआ ए मासुरा पढ़ें।

और फिर सलाम फेरें अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह पहले दाएं जानिब मुंह फेरे फिर अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह बाएं जानिब मुंह फेरें |

उसके बाद *रवन्ना अतिना फिद दुनिया हसन्तव वफिल आख़िरति हसन्तव वकीना अजबन नार* दुआ पढ़ कर अल्लाह से दुआ माँगे।

Note:- पांचो वक़्त की नमाज़ पढ़ने का तरीका तफसील से मर्द की नमाज़ मे बताया जा चुका है औरतो की नमाज़ मे जो फर्क था वो बताया हमने बाकी ज़ियादा फर्क नही है। (alert-warning)

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