Roza Rakhne Ki Dua in Hindi - रोज़े की दुआ

Roza Rakhne Ki Dua in Hindi:- इस्लाम मे, हर काम के लिए अलग दुआ 'है जो उस खास काम को करने से पहले पढ़ी जाती है। अरबी में, हम इन दुआओं को कहते हैं, नियत। नियत का अर्थ है 'इरादा'। इस्लाम में नियत या दुआ का बहुत महत्व है। आप यह भी जानते हैं कि इन दुआओं के बिना एक भी (रोजा) अधूरा है।

Roza Rakhne Ki Dua in Hindi


पैगंमबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है:-

"कर्मों का फल इरादे पर निर्भर करता है और हर व्यक्ति को उसके इरादे के अनुसार इनाम मिलेगा!"

 

बहुत सारे लोग को Arabic या Urdu में Roza Rakhne Ki Dua को पढ़ नहीं सकते हैं इसके लिए हमने आपको इस दुआ को Hindi में लिख कर बताया है ताकि आपको इसे पढ़ने में आसानी हो। वैसे तो ये कहा जाता है की Allah दिल को देखता है अगर आप मुंह से कुछ न भी बोलें तो वो हो जाता है लेकिन अगर कोई नियत की दुआ है तो इसे पढ़ लेना भी सही है।


Roza Rakhne Ki Dua in Hindi

रोजा रखने की दुआ दुनिया भर के मुसलमानों द्वारा सबसे आम और खास रूप से दी जाने वाली दुआ है। हर मुस्लिम को सहरी की दुआ अवश्य पढ़नी चाहिए।

सेहरी की यह दुआ अल्लाह की ओर से एक इनाम है। हम पर यह एक जिम्मेदारी है, जिसे पूरा करने की आवश्यकता है ताकि अल्लाह आपको अपने रहमत से नवाज़ दे। सेहरी या रोजा रखने की दुआ आपको और आपके परिवार को हराम काम करने से बचाती है।


Roza रखने की फ़ज़ीलत

वैसे तो हम आम दिनों में भी नफल रोजा रख सकते हैं लेकिन रमजान के रोज़े की बहुत ज्यादा फ़ज़ीलत है। रमजान मुस्लिम इस्लामिक कैलेंडर का 12 महीनों में से 9वां महीना है। यह इस्लामी और मुसलमानों के लिए सबसे पाक महीना है।

इस्लाम के पांच अरकानो मे रोजा भी एक रूक्न है। ये वो महिना है जिसमे अल्लाह तआला Quran sharif को इस जहाँ मे उतारा। इस महीने मे जन्नत के दरवाजे खोल दिये जाते है और जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते है। शैतान इस महीने मे क़ैद कर लिया जाता है।लेकिन इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन हमारा नफ़स होता है। हमारे नफ़स की तरबियत भी रोज़े से ही होती है। इस महीने में नफ्ल काम करने पर अल्लाह फर्ज अदा करने का सवाब और फर्ज अदा करने पर सत्तर फर्जों का सबाब देता है।

जब हम खाना, पीना, देखना या सुनना छोड़ देते हैं, तो अल्लाह हमसे खुश होता है, यह हमारे द्वारा अल्लाह के प्रति एक महान बलिदान है। इनाम में, अल्लाह हमें जीवन में बहुत सारी परेशानियां से दूर रखता है, हर व्यक्ति पहले से अधिक एक्टिव और शारीरिक रूप से स्वस्थ महसूस करता है। रोज़े को रखने से पहले आपको इसके दुआ को पढ़कर नियत करने की जरुरत होती है इसके लिए हम Roza Rakhne Ki Dua in Hindi को बता रहे हैं।


रोज़ा किस पर फ़र्ज़ है:-

हर मुस्लिम मर्द और औरत जो सेहतमंद हो बीमार ना हो अकल वाला हो उस पर रोजा फ़र्ज़ है। इस्लामी नजरिए से बच्चों के लिए 12 साल से ऊपर की उम्र पर रोजा फर्ज है।


Roza Rakhne ki Dua:-

आइए अब एक नजर रोज़ा रखने की दुआ पर डालते हैं:-


Arabic:-  وَبِصَوْ مِغَدٍ نَّوَيْتُ مِنْشَهْرِ رَمَضَانَ

Hindi:-  “वा बी सा उमी गद्दीन ना वाई तू मिन शहरे रमज़ान”

Hinglish:- "Wa Bis Saumi Gadin nawaioto min shahre Ramazan"

Meaning-  मैं रमजान के रोज़े की नीयत करता या करती हूं।

Note- अगर रमज़ान के अलावा नफिल रोजा या मन्नत का रोजा हो तो रमज़ान की जगह उसका नाम लें। (alert-warning)

तो, मेरे भाइयों और बहनों, यहाँ इस लेख में, मैंने आपको Roza Rakhne ki Dua in Hindi के बारे में सब कुछ बताया। मुझे उम्मीद है कि आपको यह लेख पढ़ना पसंद आया होगा। यदि हां, तो कृपया इसे अन्य लोगों के साथ Share करें। 

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